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In Pics: शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 183 अंक उछला

बाजार का दिशा-सूचक माना जाने वाला बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 183 अंक सुधर कर लगभग दो सप्ताह के उच्चस्तर 25,958.63 अंक पर पहुंच गया।

Surbhi Jain
Updated on: November 26, 2015 18:15 IST

In Pics: शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 183 अंक उछला- India TV Hindi

In Pics: शेयर वितरण सूचक बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 183 अंक उछला

मुंबई: स्थानीय बाजारों में आज तेजी लौट आई। बाजार का दिशा-सूचक माना जाने वाला बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 183 अंक सुधर कर लगभग दो सप्ताह के उच्चस्तर 25,958.63 अंक पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों के मिलेजुले रुख के बीच वितरण सूचक संसद में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पर गतिरोध समाप्त होने की उम्मीद के चलते निवेशकों ने रीयल्टी, वाहन और धातु कंपनियों के शेयरों की लिवाली की।

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नवंबर के डेरिवेटिव अनुबंधों को दिसंबर के लिए बढाने से भी बाजार को मदद मिली। इससे पिछले दो सत्रों में सेंसेक्स में लगभग 93 अंक का नुकसान हुआ था। ब्रोकरों ने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण जीएसटी विधेयक पर कुछ समझौते का रास्ता निकाल सकती है। इस उम्मीद में बाजार की धारणा को बल मिला। बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 182.89 अंक या 0.71 प्रतिशत के लाभ से 25,958.63 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले सेंसेक्स ने यह स्तर 9 नवंबर को देखा था। नेशनल स्टाक एक्सचेंज का निफ्टी 52.20 अंक या 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 7,883.80 अंक पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 7,832 से 7,897.10 अंक के दायरे में रहा। सेंसेक्स के 30 शेयरों में 22 लाभ में रहे।

तस्वीरों में देखिए बाजार का हाल

share market as on 26 nov

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एशियाई बाजारों में मिलाजुला रख रहा। शुरुआती कारोबार में यूरोपीय बाजार उपर चल रहे थे। टाटा मोटर्स के शेयर में सबसे अधिक मांग रही और यह 5.51 प्रतिशत चढ़ गया। सनफार्मा का शेयर 3.96 प्रतिशत के लाभ में रहा। गेल, आईटीसी, एमएंडएम, रिलायंस इंडस्ट्रीज व हीरो मोटोकार्प वितरण सूचक के शेयर भी लाभ में रहे।

सूचक पत्र अंग्रेजी में

इसके साथ ही सूचना के अधिकार अधिनियम की सफलता और असफलता उच्च शिक्षा के संस्थानों में आरटीआई के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने, आरटीआई के बदलाव का सूचक आदि विषयों पर भी एक विभिन्न सत्र में शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगें।

Academic papers on topics like Success and Failure of the Right to Information Act, Harnessing IT for RTI in an Institute of Higher Learning, RTI as an instrument of Change, Right to Petition to Right to Information etc. will also be discussed in a separate session.

सावामी जी ने मार्रेट के इस पत्र का स्वागत किया क्योंकि उसका यह पत्रइस बात का सूचक था कि मार्गरेट ने आखिर दाता की भूमिका को छोड़ दिया है और अब वह एक शिक्षार्थी बनना चाहती है।

Swamiji welcomed this letter as an indication that Margaret had at last given up the role of a giver and wanted to be a learner.

सरदार का वितरण सूचक पत्र लॉर्ड वेवेल को ता. 20-10-1946 राजा गजनफर अली खान का भाषण जिसकी प्रति संलग्न है-नं. 20 व्याकुल और अशांत बना देने वाला है और अशुभ भविष्य का सूचक है।

SARDAR TO WAVELL, DATED 20 OCTOBER 1946 Raja Ghazanfar Ali Khan 's speech copy herewith - Serial No. 20 is disconcerting and bodes ill for the future.

आपदा जोखिम न्यूनीकरण

Children play in Gehua river, Madhubani, one of the worst flood-affected districts in Bihar Province.

एक प्रतिरोधक भारत के लिए बाल केन्द्रित जोखिम सूचक तैयारी

भारत एक बहु आपदा वितरण सूचक प्रवण देश है जहाँ दुनिया के किसी भी देश के मुकाबले सबसे अधिक आपदाएँ घटती हैं. भारत के 29 राज्यों एवं 7 केंद्र शासित प्रदेशों में से 27में प्राकृतिक आपदाओं जैसे चक्रवात, भूकंप, भूस्खलन, बाढ़ और सूखे जैसी आदि का कहर निरंतर रहता है।

जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरणीय क्षति की वजह से आपदाओंकी तीव्रता एवं आवृत्ति भी अधिक हो गई है जिससे जान – माल की क्षति अधिक हो रही है. इसके अतिरिक्त देश का एक तिहाई हिस्सा नागरिक संघर्ष एवं बंद आदि से भी प्रभावित रहता है।

किसी भी आपदा में व आपदा के बाद बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं और ऐसी वास्तविकताओं को अक्सर योजनाओं एवं नीति निर्माण के समय में अनदेखा कर दिया जाता है ।

2000-2016के दौरान हुई पांच सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं लगभग में 17,671 बच्चों की जान चली गईथी । 2015-2016के सूखे मेंदस राज्यों मेंअनुमानित 330 वितरण सूचक मिलियन (33 करोड़) लोग प्रभावित हुए थे,जिनमें पांच साल से कम उम्र के 37 मिलियन (3 करोड़ 70 लाख) बच्चे शामिल थे।

इन आपदाओं का बच्चों के जीवन पर कई प्रतिकूल असर होता है। अन्य प्रभाओं के साथ प्राकृतिक आपदाओं के दौरान व उसके बाद सबसे अधिक उनका स्कूल प्रभावित होता है क्योंकि स्कूलों को आपदा के समय बतौर आश्रयस्थल इस्तेमाल किया जाता है, इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने से टीकाकरण न होना,पोषण आहार साफ पानी और स्वच्छता सुविधाओं की अनुपलब्धता के कारण कुपोषण और बीमारियाँ होती हैं। आपदाओं के दौरान हिंसा, शोषण,बाल विवाह, बाल-तस्करी और बाल-श्रम की घटनाओं में भी वृद्धि होती है।

भारत में निरंतर अलग अलग राज्यों में विभिन्न आपदाओं जैसे बाढ़, सूखा, खराब मौसम तथा संघर्ष आदि वितरण सूचक का प्रतिकूल असर महिलाओं,बच्चों व अन्य वंचित समुदाय के विकास पर पड़ता है।

यूनिसेफ बच्चों की भलाई और उनके समुदायों पर आघात और तनाव के अद्यतन जोखिम विश्लेषण का संचालन और रखरखाव करता है, जो सेवा प्रदाताओं की कम क्षमता और समुदायों की संवेदनशीलता जैसे अंतर्निहित कारणों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह साक्ष्य सरकार और उसके सहयोगियों को बच्चों को केंद्रित एवं जोखिम सूचक योजनाओं के निर्माण पर और ध्यान देने के बारे में जानकारी देता है जिससे कि बच्चों की आपदा के प्रभाव को सहन करने की शक्ति बढ़ाने, सेवाओं के निष्पादन में आने वाली रुकावटों एवं आपदाओं के प्रभाव को कम किया जा सके ।

यूनिसेफद्वारा 2018 – 2022 के लिए देश के लिए बनाए गए कार्यक्रम में प्राथमिकताओं के रूप में आपदा-जोखिम न्यूनीकरण,जलवायु परिवर्तन और सामाजिक सामंजस्य स्थापित करने को शामिल किया गया है।

इसके अंतर्गत राज्य आपदा प्रबंधन प्रशासन प्रणालियों और संस्थानों का क्षमतावर्धन,आपदा जोखिम को कम करने के लिए बच्चों सहित सामुदायिक क्षमता का निर्माण करना ।इसके अतिरिक्त शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और पानी और स्वच्छता क्षेत्रों में जोखिम न्यूनीकरण की रणनीतियों को समाहित किया गया है । हमारा जोखिम विश्लेषण बच्चों को केंद्रित कर बनाया गया है जिसमें प्राकृतिक और मानव जनित खतरों तथा संघर्षों के बच्चों एवं उनके समुदाय पर पड़ने वाले प्रभाव भी शामिल वितरण सूचक हैं । यूनिसेफ स्कूलों में बच्चों से सम्बंधित जोखिम को कम करने के लिए व्यापक रूप से स्कूल सुरक्षा कार्यक्रमों के निर्माण में भी सहयोग करता है।

यूनिसेफ सभी स्तरों पर राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन प्रशासन प्रणालियों और संस्थानों की क्षमताओं को मजबूत करने और बाल-केंद्रित, जोखिम जानकारी युक्त योजनाओं और रणनीतियों को लागू करने के लिए उनके सहयोग पर बल देता है। यूनिसेफ की जोखिम कम करने की रणनीति सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों की मजबूती, जल संरक्षण, बाढ़ और सूखे की तैयारी में सुधार; बाल सुलभ स्थानों का विस्तार; स्कूल सुरक्षाकार्यक्रम;राहत कार्यों के लिए सप्लाइ चेन मैनेजमेंट आदि पर केन्द्रित है। इसके अलावा, यूनिसेफ समुदाय आधारित आपदा जोखिम प्रबंधन कार्यक्रमों पर बल देता है जिसमें बच्चे और किशोर शामिल हैं और जिनमें जिनमें ग्रामीण एवं शहरी स्तर पर आपदा सुरक्षा सम्बन्धी गतिविधियों को संचालित किया जाता है । यूनिसेफ मानवीय परिस्थितियों जैसे कि नागरिक संघर्ष की स्थिति में भी बच्चों की सुरक्षा एवं जरूरतों पर भी विशेष ध्यान देता है।

हमारे कार्यक्रम बच्चों और किशोरों को उनके वैज्ञानिक स्वभाव को समझने के साथ उन्हें जोखिमों का आकलन करने और समझने के लिए सशक्त और सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाते हैं। परिवर्तन वाहक और भविष्य के नेताओं के रूप में भूमिका निभाने हेतु बच्चों को स्थानीय समुदाय को आपदाओं से सुरक्षित बनाने और वितरण सूचक आपदा जोखिम की जानकारी और कौशल को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

आपदा पूर्व की सुनियोजित तैयारी से देखा गया है कि आपदाओं से होने वाली क्षति कम होती है। यूनिसेफ अपने जोखिम जानकारी युक्त कार्यक्रमों द्वाराऐसी प्रणालियों को मजबूत करने के लिए भी कार्य करता है जिससे किसी भी आपदा के बाद बच्चों और उनके परिवारों की स्थिति सामान्य होने में सहायता मिल सके । ग्रामीण और शहरी समुदायों को आपदा से सुरक्षित करने की कोशिश की जा रही है, साथ ही साथ समुदाय का भी वितरण सूचक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिएभी क्षमता वर्धन किया जा रहा है जिससे वे वितरण सूचक बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा कर सकें।

मधुबनी, बिहार के मिडिल स्कूल में अपने क्लासरूम के बाहर भूकंप सुरक्षा बचाओमॉकड्रिल में भाग लेते बच्चे

UNICEF/UNI130508/Singh मधुबनी, बिहार के मिडिल स्कूल में अपने क्लासरूम के बाहर भूकंप सुरक्षा बचाओमॉकड्रिल में भाग लेते बच्चे

आपात स्थिति और मानवीय संदर्भों में, बच्चे विशेष रूप से बीमारी, कुपोषण और हिंसा के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं। प्राकृतिक आपदाएं कई लोगों को अस्थायी आश्रयों में विस्थापित करती हैं जहाँ उन्हें जीवन रक्षक बहुआयामी सहायता की सख्त जरूरत होती है। आपदा और आपात स्थिति महत्वपूर्ण सामाजिक बुनियादी ढांचे को नष्ट करती या नुकसान पहुंचाती है, जिसमें काफी बड़े क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और पानी और सफाई व्यवस्था प्रभावित होते हैं, ऐसे में एक ऐसा वातावरण बनता है जिसमें बीमारी तेजी से फैलती है और शिक्षा आदि बाधित हो जाती है।

आपातकालीन तत्परता और प्रतिक्रिया

राष्ट्रीय क्षमता और यूनिसेफ के तुलनात्मक फायदे के साथ आने से आपातकालीन तैयारी और राहत एवं बचाव तंत्र द्वारा आपातकालीन एवं मानवीय संकट में प्रभावी रूप से सामना करने में मदद मिलती है । यूनिसेफ बच्चों के लिए अपनी मुख्य प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और आपातकालीन तैयारियों पर सरकार के अनुरोधों को पूरा करने हेतु अपनी क्षमता को निरंतर विकसित करता है।

रणनीतिक साझेदारी

सरकार में यूनिसेफ की मुख्य समकक्ष संस्था

गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यूनिसेफ का मुख्य सरकारी समकक्ष है। अन्य रणनीतिक भागीदारों में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट, शहरी स्थानीय निकाय, थिंक टैंक, सिविल सोसाइटी संगठन, सेक्टोरल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और अन्य संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और विकास संगठन शामिल हैं। आपदा जोखिम में कमी पर काम करने वाले बाल-केन्द्रित गैर सरकारी संगठन (एन.जी.ओ.) समुदाय और क्षमता निर्माण गतिविधियों के प्रमुख भागीदार हैं। मीडिया, विशेष रूप से रेडियो, भी यूनिसेफ के एक महत्वपूर्ण भागीदार की भूमिका निभाता है।

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